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बाजेला बधाईया अँगनवा-दुअरिया

- केशव मोहन पाण्डेय जनम लिहले कन्हैया कि बाजेला बधाईया अँगनवा-दुअरिया नू हो। अरे माई, दुआरा पर नाचेला पँवरिया कि अइले दुखहरिया नू हो।। बिहसे ला सकल जहान कि अइले भगवान कि होई अब बिहान नू हो। अरे माई, हियरा में असरा बा जागल झुमेला नगरिया नू हो।। गरजि-चमकि मेघ बरसेले दरस के तरसेले मनवा में हरसे नू हो। अरे माई, जुग-जुग जियें नंदलाल कि आँखि के पुतरिया नू हो।। देखि के जमुना धधा गइली अउरी अगरा गइली कान्ह पर लुभइली नू हो। अरे माई, साँवरी सुरत मनभावन हटे ना…
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निबन्ध

सत्य आ धर्म का पालन के व्रत- ‘बहुरा’

- डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल भादो महीना के अन्हरिया के चौथ के बहुरा कहल जाला.कहीं-कहीं एकरा के गाइ माई के पूजा के परब मानल जाला.गाइ आपन दूध पियाके आदिमी के पालेले आ पोसेले,हमनियो के कृतज्ञ होके गाइ के  सम्मान करेके चाहीं, पूजेके चाहीं.ओइसे, हम एकरा के सत्य आउर धर्म का पालन के व्रत मानींले.एह अवसर पर गाइ आ बाघ के माटी के मूर्ति बनाकर पूजन करे के विधान प्रचलित बा. एह दिन माई-बहिन अपना संतान के रक्षा खातिर व्रत राखेलिन. कहीं-कहीं कुँआर लइकी ई व्रत करेली सन.अइसन साइत एहसे कि माई का सत्य व्रत में…
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भारतीय संस्कृति के संवाहक रक्षाबंधन के अस्तित्व संकट

- डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल सावन के पुरनवासी के इंतजार हर घर के होला काहेंकि एह दिन देश भर में राखी के तेवहार मनावल जाला. राखी माने रक्षाबंधन. ई हिंदू धर्म के लोकप्रियता के कमाल हटे कि रक्षाबंधन के तेवहार के विस्तार हिंदू धर्म से भाई-बहिन के धरम तक हो गइल बा. मानल जाला कि भाई भुजा के प्रतीक हटे आ बहिन कलाई के प्रतीक. बहिन जब भाई का कलाई प राखी बान्हेली त उनुका ई पूरा बिश्वास रहेला कि उनुकर भाई संकट परला प उनुकर रक्षा जरूर करी. बहुत…
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जबले हरियरी रही, कजरी गवात रही

- डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल चाहे शहर होखे भा गाँव आ गाँव में त अउरी, सावन के महीना आवते शुरू हो जाला लइकन के कबड्डी, खो-खो, चीका आ फनात के मजदार खेल. शहर-ओहर में त लइकियो ईहे गेमवा खेलेली सन बाकिर गाँव अबहिंयो एगो परंपरा का साथे आनंद लेत लउकेला. गाँव में अलग-अलग समूह में लइकी झुलुहा झूलेली सन आ झूलत-झुलावत गावतो रहेली सन. अक्सर सावन में ओह घरी जवन गीत अनासे मुँह से निकलेला आ सुर में सुर मिलत चलि जाला ऊहे सबसे मनोरम लोकगीत हटे- कजरी. कजरी गा-गा के जब झुलुहा…
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बाति के बतंगड़

- ओ. पी. सिंह माया महाठगिनि हम जानी. कबीर त ई बाति कहि के आराम से निकल गइलन. आजु के जमाना रहीत त महामाया भा मायावती के चेला चाटी उनुकर खटिया खड़ा कर दिहले रहीत लोग. महामाया के माया तनिका पुरान हो गइल से नयका पीढ़ी के लोग उनुका माया का बारे में कमे जानत होखी. एहसे सुना देत बानी. महामाया के माया उनुका कुरता में बसत रहुवे. उनुका बारे में कहात रहे कि सौ गो कुरता के खरचा पर ऊ कवनो चुनाव जीत सकेलें. भाषण देत देत ऊ जोश…
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साहब बुझले पियाज, सहबाइन बुझली अदरख (बतकुच्चन-201)

साहब बुझले पियाज, सहबाइन बुझली अदरख. ना ना, बतावे के कवनो जरूरत नइखे कि हम गलत कहाउत कहत बानी. असल कहाउत हमरो मालूम बा बाकिर सेकुरल कब कवना बात प बवाल मचा दीहें केहु ना बता सके. आ मतलब बात समुझवला से बा, कहाउत के माने भा ओकरा शब्दन से ना. एह कहाउत के जरूरत एहसे पड़ गइल कि हमरा अखड़ेरे मन कर दिहलसि कि आखर आ आखर के चरचा कर लीं. अब कवनो साहित्यकार से आखर के मतलब पूछब त ऊ कहीहें कि एकर मतलब भइल अक्षर आ ओकरे…
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बाति के बतंगड़ – 1

कहल जाला कि बाते से आदमी पान खाला आ बाते से लातो खाला. एके बतिया केहू के मजाक लागेला आ केहू के आपन बेइज्जति. भोजपुरी में बहुते कहाउत बाड़ी सँ जवनन के आजु के सामाजिक हालात में दोहरावल ना जा सके. खास क के ऊ सब कहाउत जवना में समाज के दबाइल अंग निशाना पर होला. गरीब के जोरु भर गाँव के भउजाई अइसहीं बन जाले. जेकरे मन करे हँसी दिल्लगी क ली आ बेचारा गरीब मन मसोस के रहि जाई. बाकि बरियरकन पर बनल कहाउतन के अबहियों बेझिझक कहल…
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भोजपुरी, राजस्‍थानी अउर भोटी के जल्दिए मिली संवैधानिक मान्‍यता

पिछला सोमार 25 जुलाई, 2016 का दिने दिल्‍ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में भोजपुरी समाज, दिल्‍ली आ राजस्‍थानी भाषा मान्‍यता समिति दुनू मिल के आयोजित केन्‍द्रीय वित्‍त राज्‍यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल के सम्‍मान समारोह आयोजित कइलें जवना मे भोजपुरी, राजस्‍थानी अउर भोटी भाषा के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करवला का मुद्दा पर जोरदार चरचा भइल. एह मौका प केन्‍द्रीय वित्‍त राज्‍यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल कहनी कि केन्द्र सरकार भोजपुरी, राजस्‍थानी अउर भोटी भाषा के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करवला लेके बहुते गंभीर बिया आ एह दिसाईं…
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पइसार आ पसार के चरचा (बतकुच्चन – 200)

बात के खासियते होला कहीं से चल के कहीं ले चहुँप जाए के. कहल त इहो जाला कि एक बार निकलल ध्वनि हमेशा खातिर अंतरिक्ष में मौजूद हो जाले. आजु पइसार आ पसार के चरचा करे बइठल हम त पसोपेश में बड़ले बानी कि कहाँ से शुरु कइल जाव. काहे कि मकसद त इहे नू बा कि बात के अतना लमरा दीहल जाव कि एह छोर से ओह छोर ले बतिआ के पसार हो जाव. बात ले त ठीक रहल बाकिर बतिआ होखते सोचे लगनी कि बतिया आ बतिआ में…
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सुबरन को ढूंढ़त फिरे कवि कामी और चोर (बतकुच्चन – 199)

भोजपुरी के एगो महान कवि रहलन महेन्दर मिसिर. उनुका के पूरबी गीतन के जनक मानल जाला. मिसिर जी के लिखल पूरबी अपना शृंगार रस का चलते बहुते लोकप्रिय भइली सँ. ओहि गीतन में से एगो गीत रहुवे - अंगुरी में डँसले बिया नगिनिया रे ननदी, भईया के जगा द. भईया के जगा द, तनी बईदा बोला द, रसे रसे उठेले लहरिया रे ननदी. एकरा साथही याद आवत बा हरीन्द्र हिमकर जी के लिखल खण्डकाव्य "रमबोला" के कुछ पंक्ति जवना में तुलसी दास के बरनन करत लिखल गइल बा - छलके…
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एगो, एकगो, आ एकेगो का चक्करघिन्नी में (बतकुच्चन – 198)

एगो, एकगो, आ एकेगो का चक्करघिन्नी में कई दिन से दिमाग में चकोह जस चलत बा आ हम ओहीमें खिंचाइल चलल जात बानी. थाह नइखे लागत कि कइसे एह चकोह से बहरी निकलीं. हिन्दी वाले त एह मामला में एक ही शब्द एक बना के निकल गइलें बाकिर भोजपुरी में त एगो आ एकगो का साथही एकेगो के चरचा भरल बा. कब कहाँ कवना के इस्तेमाल कइल जाव, कब कवन मतलब निकालल जाव एही में अझूरा के रहि गइल बानी. खोजबीन करे लगनी त एको ब्रह्म द्वितियो नास्ति का बाद…
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लाल कला मंच के काब्य गोष्ठी

दक्षिणी दिल्ली बदरपुर के मीठापुर चौक पर विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर लाल कला मंच के ओर से जागरुकता आ काब्य गोष्ठी के आयोजन कइल गइल. जेकर मुख्य उद्देश्य रहे जनसंख्या विस्फोट से होए वाला प्रभाव के कम करे के आ जनसंख्या के दर कइसे कम कइल जा सकेला एह पर चर्चा कइल. लाल कला मंच के अध्यक्ष सोनू गुप्ता अतिथि के गुलदस्ता भेट कइली. गोष्ठी के अध्यक्षता बड़ समाजसेवी राजेन्द्र अग्रवाल कइले आ मुख्य अतिथि के रुप में बड़ समाजसेवी कामरेड जगदीश चंद्र शर्मा रहले. संचालन शिव प्रभाकर…
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स्व. सत्तन के भोजपुरी कविता संग्रह “का हो ! कइसे” के विमोचन

शबद सहारे राखिये, शबद के हाथ न पाँव. एक शबद औषधि बने, एक शबद करे घाव. दीनदयाल विश्वविद्यालय गोरखपुर के हिन्दी विभागाध्यक्ष रहल प्रो. रामदेव शुक्ल कबीरदास के लिखल एह दोहा के दोहरावत कहलन कि स्व. सत्यनारायण मिश्र सत्तन कमे लिखलन बाकिर जवन लिखलन तवन बेहतर लिखलन. ऊ पिछला मंगल का दिने गोरखपुर के जर्नलिस्ट प्रेस-क्लब के खचा-खच भरल हॉल में स्व. सत्यनारायण मिश्र सत्तन के लिखल भोजपुरी कविता संग्रह "का हो ! कइसे" के विमोचन का मौका पर आपन संबोधन देत रहनी. कहनी कि सत्तन मिश्र शब्द के धड़न…
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सियासत में भाई भतीजावाद

- ‍हरिराम पाण्डेय उत्तर प्रदेश एह घरी भारत के सियासत के ड्राइंगबोर्ड बन के बइठल बा. एकरा अलग अलग हिस्सा पर अलग अलग गोल तरह तरह के चित्र बनावे में लागल बाड़ें. कांग्रेस प्रगतिशील उदार ब्राह्मणवाद के हवा देत बिया, त भाजपा कट्टरहिंदूवाद के चित्र बनावत बिया. मौजूदा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपना छवि के आकार बढ़ावे में लागल बाड़ें. अबहीं हाले में अखिलेश यादव मुख्तार अंसारी के गोल कौमी एकता दल के सपा में घोराइल रोकवा के सचहू अपना चाचा आ कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव के नाराज कर दिहलां…
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बिहार के बाद अब मुंबई में २२ जुलाई से गदर

एह साल के अबले के सबले बड़ आ चर्चित रहल भोजपुरी फिलिम गदर अब मुंबई में २२ जुलाई से प्रदर्शित होखे वाली बा. ई फिलिम बिहार में पहिलहीं से गदर मचवले बिया आ कई एक सिनेमाघर में ई लगातार हाउसफुल चलत बिया. मुंबई में रहे वाला बाकिर उत्तर भारत से आवेवाला आ दबंग निर्माता क रुप में चर्चित भूपेन्द्र विजय सिंह, बबलू गुप्ता अउर रवि सिंह एकर निर्माता हवें. कथाकार आ निर्देशक हउवन रमाकांत प्रसाद जे आयरन मैंन पवन सिंह अभिनीत एह फिलिम के भाव आ विश्वास देखावत सार्थक शब्दन…
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